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Sunday, 19 January 2025

सिविल अस्पताल होशियारपुर में ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट के रख-रखाव में घोर लापरवाही |

Gross Negligence in Maintenance of Oxygen Production Plant at Civil Hospital Hoshiarpur
Gross Negligence in Maintenance of Oxygen Production Plant at Civil Hospital Hoshiarpur

सिविल अस्पताल होशियारपुर में ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट के रख-रखाव में घोर लापरवाही

 • मरीजों की जान से खिलवाड़;  लाखों की लागत से लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट सफेद हाथी बने

 • ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र के रखरखाव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही बरती जा रही गंभीर लापरवाही

 होशियारपुर,19 जनवरी (तरसेम दीवाना)

 स्वास्थ्य विभाग के सरकारी अधिकारियों की घोर लापरवाही और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की अक्षमता के कारण सिविल अस्पताल होशियारपुर में मरते हुए मरीज को जीवन प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया गया ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट अपनी मूल स्थिति खो चुका है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की कीमती जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।  यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र के रखरखाव में स्वयं स्वास्थ्य विभाग द्वारा बरती जा रही गंभीर लापरवाही विभाग के अपने ही अधिकारियों की भारी भूमिका के कारण है, जिन्होंने कागजी कार्रवाई के अलावा किसी और चीज को कोई महत्व नहीं दिया, ताकि वे खुद को राहत दे सकें। हाल ही में इस मुद्दे को हल करने के लिए कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय मानव आबादी के स्वास्थ्य और कल्याण पर कई गंभीर प्रभाव पड़े हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी "विहड़े आई जंझ ते विन्नौं कुड़ी दे कन्न" की प्रवृत्ति का अनुसरण कर रहे:-

दरअसल हमारे देश की पूरी व्यवस्था पंजाबी कहावत "विहड़े आई जंझ ते विन्नौं कुड़ी दे कन्न" के आधार पर चलती है और यहां तक ​​कि स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग का तो आवा ही ऊतिया होया है।

  उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी ने देश में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा महामारी संबंधी चुनौतियों से निपटने में दी गई कम प्राथमिकता को उजागर किया है, विशेष रूप से देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कमियों को बहुत उजागर किया है।  बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं, जैसे ऑक्सीजन जैसे आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त आपूर्ति, और ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जो स्थानीय लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, की गंभीर रूप से कमी उजागर हुई।

होशियारपुर सिविल अस्पताल में हो रही बड़ी लापरवाही:-

होशियारपुर के सिविल अस्पताल को भले ही मेडिकल कॉलेज बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं और करोड़ों रुपए की लागत से भवन व अन्य तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन हकीकत में होशियारपुर के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ मेडिकल स्टाफ की लापरवाही के चलते प्रभु कृपा के सहारे ही चल रही हैं।  सिविल अस्पताल होशियारपुर में करोड़ों रुपए की लागत से दो ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट लगाए गए हैं ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान बचाने के लिए जीवन रक्षक उपकरणों का तुरंत उपयोग किया जा सके।  इस उद्देश्य से सिविल अस्पताल के सभी कमरों में पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।  इस ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पत्रकारों की एक टीम द्वारा किए गए दौरे के दौरान पाया गया कि दोनों ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र बंद हैं और काम करने की स्थिति में नहीं हैं।  जांच में पता चला कि ये दोनों ऑक्सीजन प्लांट पिछले करीब एक साल से बंद हैं।  इनसे मरीजों को कोई लाभ नहीं हो रहा है।  इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जीवन रक्षक उपकरणों के रखरखाव जैसे संवेदनशील मामले के प्रति स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही किस हद तक जा सकती है।

स्वास्थ्य अधिकारी क्या कहते हैं:

जीवन की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर पक्ष रखने के लिए किए गए संपर्क के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना रहा।  सबसे पहले इस मुद्दे पर संपर्क करने पर सिविल सर्जन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि इस मुद्दे पर संबंधित अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) ही जानकारी दे सकते हैं।  जब सीनियर एसएमओ डॉ. स्वाति से फोन पर बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना व कॉल बैक करना भी उचित नहीं समझा।  जब सिविल सर्जन डॉ. पवन कुमार को इस बारे में बताया गया तो उन्होंने डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. हरबंस कौर से संपर्क करने को कहा।  लेकिन उप चिकित्सा आयुक्त का जिम्मेदार पद संभालने वाली डॉ. हरबंस कौर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय ना देते हुए बडी सफाई से अपना पला झाड दिया।  जब सिविल सर्जन को इस बारे में जानकारी दी गई तो उन्होंने एसएमओ डॉ. कुलदीप सिंह घोत्रा ​​की ड्यूटी लगाई। जब पत्रकारों ने स्थिति जानने के लिए उनके कार्यालय में संपर्क किया तो उन्होंने ऑक्सीजन प्लांट की देखरेख कर रहे सचिन नामक ठेका कर्मचारी को बुलाया और उस से जानकारी लेने के बाद बताया कि करीब एक साल पहले ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट की पाइपें चोरी हो गई थी, जिसके संबंध में मॉडल टाउन थाने में लिखित सूचना दी गई है और विभाग के अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है। मरम्मत के लिए स्वीकृति मांगने के लिए पत्र लिखा गया है। दूसरे ऑक्सीजन प्लांट के बारे में उन्होंने कहा कि उनके जनरेटर का कंप्रेसर खराब हो गया था और सर्विस के लिए समय होने के कारण वह उपयोग में नहीं था।

खैर असलीयत जो भी हो, लेकिन तथ्य यह है कि दोनों ऑक्सीजन प्लांट, जो कि आपातकालीन स्थिति में जीवन रक्षक उपकरण हैं, लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं, यह न केवल सिविल अस्पताल होशियारपुर के वर्तमान प्रशासक की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है, बल्कि यह भी कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई है। बल्कि उनकी प्रशासनिक क्षमता पर भी असर पड़ेगा।  पत्रकारों ने लंबे समय से बंद पड़े इन ऑक्सीजन प्लांटों की मरम्मत न करवाने वाले गैरजिम्मेदार अस्पताल प्रशासकों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने तथा और पंजाब सरकार से मांग की कि इन्हें ठीक करके मरीजों के लिए उपयोगी बनाया जाए।  जीवन रक्षक उपकरणों की चोरी के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की तत्काल और गहन जांच की जानी चाहिए, तथा अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए तथा अधिकारियों को उनकी घोर लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।  यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि करदाताओं के धन का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए, तथा समाज के लाभ के लिए सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा और उचित रखरखाव किया जाए।  लोगों की बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को बिना किसी समझौते के पूरा किया जाना चाहिए।  पत्रकारों ने जब इस गंभीर मसले के त्वरित समाधान के लिए सरकार की ओर देखने की बजाय सोनालीका, महावीर स्पिनिंग मिल, हॉकिंस कुकर व रिलायंस जैसी संस्थाओं से सहयोग लेने का सुझाव दिया तो एसएमओ डॉ. कुलदीप सिंह घोत्रा ​​ने सहमति जताते हुए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया।