Friday, 18 October 2024
Religious
अगर आप संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं तो भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए पढ़ें ये व्रत कथा
पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस महीने वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का वरदान देते हैं, साथ ही भक्तों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत की कथा पढ़ना भी बेहद शुभ माना जाता है, और इसे पढ़कर ही पूजा को संपन्न माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कथा उस समय की है जब भगवान विष्णु का विवाह हो रहा था। इस विवाह में सभी देवताओं को निमंत्रण भेजा गया, लेकिन भगवान गणेश को न्योता नहीं भेजा गया। जब सभी ने देखा कि गणेशजी बारात में नहीं आए हैं, तो यह स्वीकार किया गया कि उनकी अनुपस्थिति में भी कोई बात नहीं है। हालांकि, गणेशजी ने स्वयं वहां पहुंचने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें घर की रखवाली के लिए बैठा दिया गया।
इस दौरान नारदजी वहां आए और गणेशजी से पूछा कि वह दरवाजे पर अकेले क्यों हैं। गणेशजी ने बताया कि भगवान विष्णु ने उनका अपमान किया है। इस पर नारदजी ने सलाह दी कि वह अपनी मूषक सेना को बारात के आगे का रास्ता खोदने के लिए भेज दें। जब सभी बाराती जमीन में धंस जाएंगे, तो उन्हें सम्मान के साथ बुलाना पड़ेगा। गणेशजी ने ऐसा ही किया और इसके बाद सभी बाराती मूषकों द्वारा खोदी गई जमीन में धंस गए।
कई प्रयासों के बावजूद कोई भी बारातियों को निकाल नहीं सका। अंततः नारदजी ने भगवान शिव से विनती की कि गणेशजी को बुलाया जाए। इसके बाद गणपति बप्पा आए, उनका सम्मानपूर्वक पूजन किया गया, और सभी बाधाएं दूर हुईं। इस घटना के बाद यह कहा गया कि यदि गणपति बप्पा का सर्वप्रथम पूजन नहीं किया गया, तो सभी कार्य विफल हो जाते हैं। तब से संकटों से मुक्ति पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।
इस वर्ष वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने वाले भक्तों के लिए यह कथा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
If you are observing the fast of sankashti chaturthi, then read this fasting story to get the blessings of lord ganesha