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Saturday, 16 November 2024

जानें गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2024 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में

Know about the date, auspicious time, puja method and significance of ganadhipa sankashti chaturthi 2024
Know about the date, auspicious time, puja method and significance of ganadhipa sankashti chaturthi 2024

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में 13 संकष्टी चतुर्थी व्रतों में से एक मानी जाती है। यह व्रत विशेष रूप से कार्तिक मास के दौरान आता है। चतुर्थी तिथि पूर्णिमा कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष महीने और अमांत कैलेंडर के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष में पड़ती है। इसे भगवान गणेश को समर्पित किया गया है।

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2024 तिथि और समय

- तिथि प्रारंभ: 18 नवंबर 2024, शाम 6:55 बजे - तिथि समाप्त: 19 नवंबर 2024, शाम 5:28 बजे

- पूजा का शुभ मुहूर्त:

- सुबह: 9:26 बजे से 10:46 बजे तक - शाम: 5:26 बजे से रात 7:06 बजे तक - चंद्रोदय का समय: 7:34 बजे

गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि:

1. स्नान और तैयारी: सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. गणेश स्थापना: भगवान गणेश की मूर्ति को साफ स्थान पर रखें और पंचामृत से स्नान कराएं।

3. दीप प्रज्वलन: मूर्ति के सामने दीया जलाएं, कुमकुम से तिलक करें, पीला सिंदूर चढ़ाएं, और मोदक का भोग लगाएं।

4. दूर्वा चढ़ाना: भगवान गणेश को उनकी पसंदीदा दूर्वा घास अर्पित करें। 5. गणेश कथा: व्रत कथा का पाठ करें और आरती उतारें।

6. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार और मित्रों के बीच बांटें।

गणाधिप संकष्टी व्रत का महत्व:

गणाधिप संकष्टी व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है। यह व्रत जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि लाने वाला माना गया है। इसे रखने से व्यक्ति बाधाओं और कठिनाइयों से मुक्ति पाता है।

- स्वास्थ्य और बुद्धि का आशीर्वाद: भगवान गणेश को बुद्धि और स्वास्थ्य के देवता माना जाता है।

- आध्यात्मिक उन्नति: यह व्रत मोक्ष प्राप्ति और आत्मिक शुद्धि के मार्ग में सहायक होता है।

- समृद्धि: यह व्रत परिवार में समृद्धि और उन्नति लाने का प्रतीक है।

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