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Sunday, 20 October 2024

जानिए क्यों की जाती है दिवाली की पूजा रात में, क्या हैं इसके पीछे धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं

Know why diwali is worshipped at night, what are the religious and mythological beliefs behind it
Know why diwali is worshipped at night, what are the religious and mythological beliefs behind it

दीपावली, जिसे अमावस्या का त्योहार भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है। इस दिन माता लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व होता है, जो धन और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दीपावली पर लक्ष्मी पूजन हमेशा रात्रि में ही क्यों किया जाता है? इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और ज्योतिषीय कारण हैं जो इस परंपरा को और भी खास बनाते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त के तुरंत बाद किया जाना चाहिए। अन्य दिनों में आप सुबह या शाम किसी भी समय लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं, लेकिन दीपावली पर रात्रि में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।

हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि रात्रि का समय माता लक्ष्मी का प्रिय समय होता है। दीपावली के दिन अमावस्या होती है, जब चारों ओर अंधकार होता है। इस समय दीप जलाकर घरों में लक्ष्मी जी का स्वागत किया जाता है, क्योंकि ज्योति का महत्व अंधकार में ही होता है। लक्ष्मी जी को ज्योति का प्रतीक माना जाता है, और रात्रि में दीप जलाने से यह संदेश दिया जाता है कि हम अपने जीवन से अज्ञानता और अंधकार को दूर कर रहे हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था, और तभी से दीपावली के दिन उनका पूजन किया जाता है। यह घटना भी रात्रि में हुई थी, जिसके कारण दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए रात्रि का समय अत्यधिक शुभ माना जाता है। माना जाता है कि लक्ष्मी जी इस समय पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशमय घरों में वास करती हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त अमावस्या के बाद का समय होता है, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है। यह समय सूर्यास्त के तीन घंटे बाद तक रहता है और इसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस समय तामसिक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। लक्ष्मी पूजन के दौरान किए गए मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्वलन से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

लक्ष्मी जी को स्वच्छता और सफाई अत्यधिक प्रिय होती है। इसलिए दीपावली पर घरों की साफ-सफाई और सजावट की जाती है। रात्रि के समय जब घर दीपों से जगमगाते हैं, तो यह शुभ संकेत होता है कि लक्ष्मी जी का स्वागत किया जा रहा है। लक्ष्मी पूजन के दौरान दीप, फूल, फल, मिठाई और चावल अर्पित किए जाते हैं और अंत में आरती के बाद मुख्य द्वार पर दीप जलाए जाते हैं ताकि लक्ष्मी जी का घर में प्रवेश हो सके।

अमावस्या का दिन तामसिक प्रवृत्तियों का समय माना जाता है, लेकिन दीपावली पर लक्ष्मी जी की कृपा से यह समय शुभ और मंगलमय बन जाता है। यही कारण है कि दीपावली की रात को किए गए लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है और इसे करने से पूरे साल घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।

लक्ष्मी पूजन का रात्रि में होने का महत्व धार्मिक, ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। यह पूजा न सिर्फ हमारे धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में अज्ञानता और अंधकार को मिटाकर ज्योति, ज्ञान और समृद्धि का स्वागत करने का भी अवसर है।

  Know why diwali is worshipped at night, what are the religious and mythological beliefs behind it