Thursday, 28 November 2024
Punjab News
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कब्रिस्तान-मस्जिद की भूमि वक्फ संपत्ति मानी जाएगी
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि राजस्व अभिलेखों में किसी भूमि को तकिया, कब्रिस्तान या मस्जिद के रूप में दर्ज किया गया है, तो वह भूमि वक्फ संपत्ति मानी जाएगी, भले ही मुस्लिम समुदाय ने उस पर लंबे समय से कोई दावा न किया हो या उसका उपयोग न किया गया हो।
कपूरथला के बुधो पुंडेर गांव की ग्राम पंचायत ने वक्फ न्यायाधिकरण के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें विवादित भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कर पंचायत को भूमि पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोका गया था। यह भूमि 1922 में महाराजा कपूरथला द्वारा सूबे शाह के बेटों निक्के शा और सलामत शा को तकिया, कब्रिस्तान और मस्जिद के रूप में दान दी गई थी।
भारत-पाक विभाजन के बाद शा बंधु पाकिस्तान चले गए, और विवादित भूमि को ग्राम पंचायत के नाम पर दर्ज कर दिया गया। 1966 में हुए पुनः सर्वेक्षण में भूमि को राज्य संपत्ति घोषित किया गया, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड के वर्गीकरण कॉलम में इसे मस्जिद, कब्रिस्तान और तकिया के रूप में दर्ज किया गया था।
ग्राम पंचायत का दावा था कि वक्फ न्यायाधिकरण को यह आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों का समाधान पंजाब वक्फ अधिनियम के तहत न्यायाधिकरण के पास है और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज शामलात देह की प्रविष्टि का कोई कानूनी महत्व नहीं है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि को मस्जिद, कब्रिस्तान और तकिया के रूप में दर्ज करने वाली प्रविष्टि निर्णायक है। भले ही मुस्लिम समुदाय ने इस भूमि का लंबे समय तक उपयोग न किया हो, लेकिन इसे वक्फ संपत्ति के रूप में संरक्षित किया जाना आवश्यक है।
Punjab - haryana high court decision, the land of cemetery-mosque recorded in the revenue records will be considered as waqf property