ePaper Reading mode

Rzana Punjab ePaper

Tuesday, 29 April 2025

जापान ने सूरज की किरणों से अंतरिक्ष में बिजली बना कर पृथ्वी तक पहुंचाने की दिशा में बढ़ाया एक और कदम

Japan's OHISAMA Project Aims to Beam Solar Power from Space to Earth
Japan's OHISAMA Project Aims to Beam Solar Power from Space to Earth

बिजली अब तारों के सहारे नहीं, बल्कि सीधे अंतरिक्ष से धरती तक पहुंचाई जा सकती है—ये विचार अब सिर्फ कल्पना नहीं रहा। जापान ने सौर ऊर्जा को अंतरिक्ष में इकट्ठा कर पृथ्वी तक पहुंचाने के लिए माइक्रोवेव तकनीक के जरिए एक नया प्रयोग शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नाम "OHISAMA" है, जिसका मतलब जापानी में "सूरज" होता है।

जल्द ही जापान एक 400 पाउंड वजनी सैटेलाइट को निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में लॉन्च करेगा। इसमें लगे 22 वर्ग फुट के सोलर पैनल सूर्य की किरणों से बैटरी चार्ज करेंगे। फिर इस ऊर्जा को माइक्रोवेव में बदलकर पृथ्वी पर स्थित एंटेना के नेटवर्क को भेजा जाएगा।

इस सैटेलाइट से लगभग 1 किलोवाट ऊर्जा 400 किलोमीटर की ऊंचाई से ट्रांसमिट की जाएगी, जो कि एक घंटे के लिए डिशवॉशर चलाने जितनी होगी। परीक्षण के लिए जापान के सुवा शहर में 13 रिसीवरों का नेटवर्क तैयार किया गया है।

भले ही यह शुरुआत छोटी है, लेकिन इसका सफल होना भविष्य में पृथ्वी पर स्वच्छ ऊर्जा लाने का नया जरिया बन सकता है। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार लागत एक बड़ी चुनौती है। नासा के अनुसार, इस तकनीक से बिजली पैदा करने की लागत 61 सेंट प्रति किलोवाट-घंटा होगी, जबकि धरती पर सौर या पवन ऊर्जा की लागत सिर्फ 5 सेंट प्रति किलोवाट-घंटा है।

इसके बावजूद, जापान की यह पहल यह दर्शाती है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष से ऊर्जा लाना केवल वैज्ञानिक कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन सकती है।