Skip to content

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाया, पंजाब और हरियाणा सरकारों को लगाई फटकार

Supreme court takes tough stand on air pollution, reprimands punjab and haryana government
Supreme court takes tough stand on air pollution, reprimands punjab and haryana government
Share Facebook X WhatsApp Telegram Email
View in ePaper

दिल्ली की वायु गुणवत्ता के और खराब होने की आशंका के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकारों को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने में विफल रहने पर कड़ी आलोचना की है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और राज्य सरकारों ने पराली जलाने के मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, केवल बैठकें हो रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका की अगुवाई वाली पीठ ने सवाल किया कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। कोर्ट ने कहा, 29 अगस्त को हुई बैठक में पराली जलाने पर कोई चर्चा नहीं हुई और सितंबर में भी कोई बैठक नहीं हुई। यह सब हवा में है और जमीनी कार्रवाई का पूर्ण अभाव है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक बाधाओं को छोड़कर, जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, अन्यथा हालात में सुधार नहीं होगा। कोर्ट ने कहा, अगर समितियां बैठकें नहीं करतीं, तो प्रवर्तन का कार्य कौन करेगा? नाममात्र के जुर्माने क्यों लगाए जा रहे हैं? कठोर प्रावधानों का उपयोग करें और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करें।

पंजाब सरकार ने कोर्ट को बताया कि राज्य को फसल प्रबंधन मशीनों के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार से धन की आवश्यकता है। पंजाब सरकार के वकील ने कहा, पंजाब के किसानों के पास मशीनों के लिए धन नहीं है।

हरियाणा सरकार ने भी अपनी दलील दी, जिसमें कहा गया कि इस साल पराली जलाने के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि अधिकारी आगामी विधानसभा चुनावों में व्यस्त हैं।

केंद्र ने कोर्ट को जानकारी दी कि किसानों को पराली जलाने के नकारात्मक प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और जानबूझकर नरम प्रावधानों का उपयोग किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, एफआईआर कहां हैं? केवल नरम उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा।"

कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) में खाली पड़े दो पदों पर भी सवाल उठाया और केंद्र को जल्द से जल्द इन पदों को भरने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर अगली सुनवाई तक यह पद नहीं भरे जाते, तो वह स्वयं सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार प्रयोग करेगा। अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

हर साल सर्दियों के दौरान, दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुँच जाता है, खासकर दिवाली के आसपास। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को इसके प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

  Supreme court takes tough stand on air pollution, reprimands punjab and haryana government