नवंबर की शुरुआत के बावजूद तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे गेहूं की बुआई में देरी हो रही है। पंजाब में किसान इस बढ़ी गर्मी से चिंतित हैं, क्योंकि गेहूं की बुआई का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है, और कई किसानों की धान की फसल भी अभी तक नहीं बिकी है, जिससे उनके खेत खाली नहीं हो सके हैं।
जिन खेतों में धान की कटाई हो चुकी है, वहां किसानों ने धान के अवशेषों को पराली में बदलने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि, बेलरों की कमी के चलते पराली के गांठ बनाने में देरी हो रही है। इस बीच, कुछ किसान बढ़ी हुई गर्मी को एक अस्थायी राहत के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि अगर मौसम ठंडा होता और बेलर उपलब्ध नहीं होते, तो उन्हें पराली जलाने का सहारा लेना पड़ता। लेकिन इस गर्मी के कारण वे गेहूं की बुआई के लिए इंतजार कर रहे हैं।
पिछली गर्मियों में भी बढ़ते तापमान के कारण धान की रोपाई में काफी देरी हुई थी। कई किसानों को दोबारा धान की रोपाई करनी पड़ी थी, क्योंकि पनीरी गर्मी सहन नहीं कर सकी थी। अब, वही स्थिति गेहूं के लिए बन रही है। आमतौर पर किसान इस समय तक गेहूं की आधी बुआई कर लेते हैं, लेकिन अभी कई जिलों में धान की कटाई ही पूरी नहीं हुई है।
पूर्व कृषि आयुक्त डॉ. बलविंदर सिंह सिद्धू का मानना है कि मौसम में बदलाव के कारण ऐसा हो रहा है। मौसम विभाग ने हाल ही में बताया कि इस साल अक्टूबर का महीना 1901 से लेकर अब तक का सबसे गर्म रहा है, औसतन तापमान 1.85 डिग्री ज्यादा दर्ज हुआ है। डॉ. सिद्धू के अनुसार, पुराने समय में किसान ठंड बढ़ने के बाद ही गेहूं की बुआई करते थे, जिससे जर्मिनेशन में कोई समस्या नहीं होती थी। वर्तमान गर्मी में बुआई करना किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है, और दिन-रात के तापमान में बढ़ा अंतर भी फसल के लिए अच्छा नहीं है।
अगर मार्च-अप्रैल में तापमान स्थिर रहा, तो फसल की पैदावार पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अभी के मौसम के अनुसार गेहूं की बुआई में देरी होना संभावित है।
Farmers are worried due to november heat, wheat sowing may be affected