मध्य प्रदेश इस साल धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने के मामलों में पंजाब से आगे निकल गया है। 14 नवंबर 2024 तक की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 8,917 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए, जबकि पंजाब में यह संख्या 7,626 रही। यह पहली बार है जब मध्य प्रदेश ने पराली जलाने के मामलों में पंजाब को पीछे छोड़ा है। मध्य प्रदेश में पंजाब से 14.5% अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जो पर्यावरणीय दृष्टि से चिंता का विषय है।
पंजाब में इस साल पराली जलाने के मामलों में 70% की कमी आई है। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब ने कुल 2,99,255 मामले दर्ज किए हैं, जबकि मध्य प्रदेश में यह संख्या 55,462 रही। इससे यह साफ है कि पंजाब ने पराली जलाने की समस्या पर नियंत्रण पाने में काफी प्रगति की है।
हरियाणा ने भी पराली जलाने के मामलों में सुधार किया है और अब शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। 14 नवंबर 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार: - मध्य प्रदेश: 8,917 मामले - पंजाब: 7,626 मामले - उत्तर प्रदेश: 2,375 मामले - राजस्थान: 1,906 मामले - हरियाणा: 1,036 मामले - दिल्ली: केवल 12 मामले
पंजाब में मध्य प्रदेश की तुलना में फायर रेडिएटिव पावर (FRP) अधिक रिपोर्ट की गई है। FRP से पता चलता है कि कितनी पराली जलाई गई और उससे कितनी गर्मी उत्पन्न हुई। हालांकि, मामलों में कमी के साथ पंजाब ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
पंजाब सरकार ने पराली जलाने के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। - 12 नवंबर 2024 तक: 3,545 मामलों में पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹92.32 लाख वसूले गए। - एफआईआर: 3,969 मामले दर्ज हुए। - रेड एंट्री: 3,531 मामलों में की गई।
Madhya pradesh left punjab behind in cases of stubble burning