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लाइव संसद शीतकालीन सत्र: लोकसभा और राज्यसभा में बहस और व्यवधानों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

Parliament Winter Session Day 18: One Nation One Election Bill Tabled in Lok Sabha
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संसद का शीतकालीन सत्र कई प्रमुख बहसों और व्यवधानों से गुजर रहा है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों में तनावपूर्ण माहौल देखा जा रहा है। गुरुवार को राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा, जिससे दोनों सदनों में गहमागहमी का माहौल बना।

लोकसभा: व्यक्तिगत टिप्पणियों से हुआ हंगामा

लोकसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के परिवार और रूप-रंग पर व्यक्तिगत टिप्पणी की, जिससे सदन में भारी हंगामा हुआ। इस टिप्पणी के बाद भाजपा के सांसदों ने विरोध जताया और बहस तेज हो गई।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने इस टिप्पणी की निंदा करते हुए इसे सदन की गरिमा का उल्लंघन बताया और सभी सांसदों से जाति, समाज या लिंग से संबंधित व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि कल्याण बनर्जी ने सदन में और लिखित रूप में माफी मांगी थी।

इसी बीच, कांग्रेस ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ की गई "मानहानिकारी टिप्पणियों" को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की।

राज्यसभा: नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल

राज्यसभा में गुरुवार को फिर से व्यवधान हुआ, जब भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने अमेरिकी हेज फंड टाइकून जॉर्ज सोरोस से संबंध रखने का प्रयास किया है और अध्यक्ष के आदेश को चुनौती दी है। इस आरोप के बाद सदन में और भी तनाव बढ़ गया।

राज्यसभा अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने विपक्ष द्वारा दाखिल किए गए छह नोटिसों को खारिज कर दिया, जिनमें विपक्ष ने दिन के तय व्यवसाय को स्थगित कर विशेष मुद्दों पर चर्चा करने की मांग की थी। नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर सार्वजनिक रूप से अध्यक्ष के अधिकारों को चुनौती देने का आरोप लगाया।

नारेबाजी के कारण कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्ष का विरोध और रणनीति

दिन की कार्यवाही से पहले, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति पर चर्चा करने के लिए बैठक की। इसके बाद, विपक्षी दलों ने संसद के बाहर आदानी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन विपक्ष द्वारा संसद में आर्थिक मुद्दों को उठाने के प्रयास का हिस्सा था।

सरकार की विधायी कार्यवाही

गर्मागरम बहसों और व्यवधानों के बावजूद, सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में तीन विधेयकों को अंतिम मंजूरी और पास करने के लिए सूचीबद्ध किया है। यह विधायी कार्य सरकार के लिए शीतकालीन सत्र में काम जारी रखने पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत है।

संसद में शिष्टाचार की आवश्यकता

जैसे-जैसे व्यक्तिगत हमले और राजनीतिक आरोप बढ़ते जा रहे हैं, सदन की गरिमा और सार्थक बहस के महत्व को समझने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की अपील ने यह स्पष्ट किया कि सांसदों को व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचते हुए मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

निष्कर्ष

संसद का शीतकालीन सत्र देश की राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, लोकतंत्र में तीखी बहस और व्यवधान अनिवार्य हैं, लेकिन संसद की कार्यवाही को निर्विघ्न रूप से चलाने के लिए शिष्टाचार और विधायी जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ेगा, यह देखना होगा कि दोनों पक्ष इस चुनौतीपूर्ण माहौल में कैसे आगे बढ़ते हैं।

संसद की प्रक्रिया को व्यक्तिगत हमलों से नहीं, बल्कि निर्माणात्मक बहस से परिभाषित किया जाना चाहिए।