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संसद शीतकालीन सत्र का 18वां दिन: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल लोकसभा में पेश, राज्यसभा में संविधान पर चर्चा जारी||

Parliament Winter Session Day 18: One Nation One Election Bill Tabled in Lok Sabha
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संसद के शीतकालीन सत्र के 18वें दिन, 17 दिसंबर 2024, देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) बिल लोकसभा में पेश किया। वहीं, राज्यसभा में संविधान के 75 वर्षों पर चर्चा लगातार दूसरे दिन जारी रही।

लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस विधेयक को पेश करते हुए कहा कि बार-बार चुनाव होने से देश में विकास कार्य बाधित होते हैं और प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव पड़ता है।

वन नेशन, वन इलेक्शन का मुख्य उद्देश्य:

  1. चुनावी खर्च में कमी।
  2. लगातार लागू होने वाले आचार संहिता (MCC) से विकास कार्यों को राहत।
  3. चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुचारू और कुशल बनाना।

हालांकि, विपक्षी दलों ने इस बिल पर सवाल उठाते हुए इसे संघीय ढांचे के लिए चुनौती बताया और कहा कि इससे राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

वहीं, राज्यसभा में संविधान के 75 वर्षों पर चर्चा का दूसरा दिन रहा। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि भारतीय संविधान दुनिया का सबसे मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान करता है।

विभिन्न दलों के नेताओं ने संविधान की सफलता, लोकतंत्र में उसकी भूमिका और संघवाद पर अपने विचार रखे।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल की गंभीरता को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया, ताकि सभी सदस्य सदन में उपस्थित रहें।

सोमवार को लोकसभा में अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी थी, जिसे आगामी दिनों में पूरा किए जाने की संभावना है।

इस बीच, हल्के विरोध के बावजूद संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चली, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों और बहसों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

शीतकालीन सत्र के 18वें दिन ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पेश होने के साथ ही यह विषय देशव्यापी चर्चा का केंद्र बन गया है। वहीं, संविधान के 75 वर्षों पर चल रही बहस संसदीय लोकतंत्र और संविधान की प्रासंगिकता को मजबूत करने का कार्य कर रही है। आने वाले दिनों में संसद में इस पर और गहन बहस देखने को मिलेगी।