जालंधर (खुराना):
जालंधर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर हुए सैकड़ों करोड़ के कथित घोटाले का मामला अब केंद्र सरकार के दरवाज़े तक पहुँच चुका है। 900 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग के बावजूद ज़मीनी स्तर पर विकास कार्यों का अधूरा और घटिया स्वरूप अब सवालों के घेरे में है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में इस प्रोजेक्ट से जुड़ा रिकार्ड तलब किया है और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, टेक्निकल ऑडिट की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि आगामी हफ्तों में विजीलेंस विभाग और केंद्रीय एजेंसियां इस मामले में ठोस कदम उठाएंगी।
कागज़ों पर चमकती स्मार्ट सिटी, हकीकत में बदहाल इन्फ्रास्ट्रक्चर
स्मार्ट रोड, एलईडी लाइट्स, चौक सौंदर्यकरण, और पार्क विकास जैसे कई प्रोजेक्ट्स की स्थिति बेहद खराब है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि करोड़ों की लागत से बनी सड़कें कुछ ही महीनों में टूट गईं, लाइटें बंद पड़ी हैं और नालियों में गंदगी का अंबार है।
फंड की भारी बर्बादी के बावजूद प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग बेहद कमजोर रही। यह भी सामने आया है कि कई काम बिना टेंडर प्रक्रिया के दिए गए और कई ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तों में छूट दी गई।
ऑडिट रिपोर्ट्स से उजागर हुईं गड़बड़ियाँ
कैग (CAG) की हालिया फाइनेंशियल ऑडिट रिपोर्ट ने साल 2021-2022 को घोटालों का सबसे काला दौर बताया है। कांग्रेस शासनकाल के दौरान स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में 500 करोड़ से अधिक का खर्च हुआ, लेकिन काम का कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा। इसके विपरीत, पिछली सरकारों के छह वर्षों में कुल 100 करोड़ से कम खर्च हुए थे।
सूची में JE से लेकर CEO तक, कई अधिकारी जांच के दायरे में
विजीलेंस विभाग ने उन अधिकारियों की सूची तैयार कर ली है, जो घोटाले के समय अपनी-अपनी जिम्मेदारियों पर तैनात थे। इसमें सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और अकाउंट्स विभाग के अधिकारी शामिल हैं। इनमें से कई अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उन पर भी जांच की आंच आने वाली है।
केंद्र सरकार की संभावित सख्ती, चुनाव से पहले हो सकती है कार्रवाई
सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई कर सकती है। भाजपा नेताओं द्वारा इस घोटाले को संसद और मीडिया में बार-बार उठाने के बाद यह अब राष्ट्रीय स्तर पर एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
विशेषज्ञों की राय है कि फाइनेंशियल ऑडिट के साथ-साथ टेक्निकल ऑडिट भी बेहद ज़रूरी है ताकि ठेकेदारों द्वारा किए गए घटिया कार्यों के प्रमाण जुटाए जा सकें और दोषियों को सज़ा दी जा सके।
जनता की आवाज़: "हमें चाहिए जवाब और न्याय"
स्थानीय जनता और विपक्षी दलों की यह मांग है कि भ्रष्टाचारियों को बचाया न जाए और जिस पैसे से शहर को स्मार्ट बनना था, उसका हिसाब ज़रूर लिया जाए। अब देखना होगा कि जालंधर स्मार्ट सिटी के नाम पर हुआ यह बड़ा घोटाला क्या राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के बल पर उजागर हो पाएगा या फिर यह भी किसी और फाइल के नीचे दब जाएगा?