पंजाब कांग्रेस एक बार फिर से आंतरिक विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। जालंधर ज़िले के कांग्रेस लीगल सेल के प्रधान एडवोकेट गुरजीत सिंह काहलों ने रविवार को अपने पद से इस्तीफ़ा देकर संगठन के भीतर हलचल मचा दी।
काहलों ने जालंधर क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने इस्तीफ़े की घोषणा की और साथ ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर गंभीर आरोप लगाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान काहलों ने खुलकर कहा,
“मैं राजा वड़िंग के रवैये से बेहद नाखुश हूं। उनके नेतृत्व में काम करना असंभव है, इसलिए मैं पद छोड़ रहा हूं। लेकिन मैं कांग्रेस पार्टी में रहकर संगठन के हित में काम करता रहूंगा।”
काहलों के इस बयान से यह साफ संकेत मिला कि पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर नाराज़गी और गुटबाज़ी एक बार फिर सतह पर आ गई है।
विवाद की जड़ तरनतारन उपचुनाव के दौरान सामने आई, जब राजा वड़िंग द्वारा देश के पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह को लेकर की गई कथित रंगभेदी टिप्पणी ने पार्टी के भीतर असंतोष पैदा कर दिया।
अब गुरजीत सिंह काहलों का इस्तीफ़ा इसी विवाद को और हवा दे रहा है, जिससे पंजाब कांग्रेस के भीतर तनाव और गहरा सकता है।
एडवोकेट गुरजीत सिंह काहलों लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पार्टी में रहते हुए कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और कानूनी मामलों, चुनावी तैयारियों और जनहित याचिकाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके इस्तीफ़े को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पंजाब कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार, काहलों के इस्तीफ़े के बाद कांग्रेस आलाकमान इस मसले पर अंदरूनी बैठक बुला सकता है।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि इस तरह के विवाद सार्वजनिक रूप से न बढ़ें, क्योंकि इससे विपक्ष को राजनीतिक फायदा मिल सकता है।