जालंधर। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) जालंधर में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक क्लर्क को कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी तक नहीं होने के बावजूद, वह एक निजी व्यक्ति से अपनी सरकारी आईडी चलवाती/चलवाता है और दफ्तर के कामकाज में उसे अनधिकृत रूप से शामिल करता है। आरोप है कि इसके बदले रिश्वतखोरी के जरिए अवैध कमाई की जा रही है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि क्लर्क न सिर्फ लाइसेंस और बैकलॉग एंट्री जैसे कामों को इधर-उधर भेज देता है, बल्कि अक्सर बिना कारण लोगों को चक्कर कटवाए जाते हैं।
कई आवेदकों ने आरोप लगाया कि—
-
कभी कलर कॉपी की मांग,
-
तो कभी स्वास्थ्य समस्या बताकर छुट्टी,
—के बहाने से काम लगातार टाला जाता है।
लोगों का कहना है कि “किसी का काम करके खुश नहीं होते, हर काम में देरी और बहानेबाज़ी होती है,” जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत में दावा किया गया है कि भ्रष्टाचार से जमा की गई रकम से संबंधित व्यक्ति ने लुधियाना में कई दुकानें भी बनवा ली हैं। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विजिलेंस विभाग को इस मामले में जांच की मांग वाली शिकायतें भेजी गई हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यदि आरोप प्रथमदृष्टया गंभीर पाए गए, तो मामले की औपचारिक जांच शुरू की जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि RTO जालंधर में लंबे समय से पारदर्शिता और प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।