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जालंधर RTO कार्यालय में कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर जनता में नाराज़गी, कार्रवाई की उठी मांग:

Public Anger Grows Over Staff Behavior and Backlog Issues at Jalandhar RTO Office
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जालंधर, पंजाब: (इशिता सेठ) जालंधर RTO ऑफिस में ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री लंबे समय से अपडेट न होने के कारण आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।कई आवेदकों का कहना है कि उन्होंने लाइसेंस के लिए सभी औपचारिकताएँ पूरी कर ली हैं,परीक्षा भी पास कर ली है,लेकिन रिकॉर्ड अपडेट न होने के कारण उनके लाइसेंस अभी तक सिस्टम में दिखाई नहीं दे रहे। आवेदकों के अनुसार, RTO कार्यालय में बैकलॉग एंट्री से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।“हम कई दिनों से ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं,लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि सिस्टम अपडेट नहीं हुआ।बिना एंट्री के हम न नया लाइसेंस डाउनलोड कर पा रहे हैं और न कोई अन्य प्रक्रिया पूरी हो रही है,” एक आवेदक ने बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बैकलॉग एंट्री न होने के कारण नौकरी में देरी,वाहन खरीद–फरोख्त में दिक्कत,और पुलिस चेकिंग के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। इधर परिवहन विभाग की ओर से स्थिति को सुधारने के लिए अतिरिक्त स्टाफ लगाने की मांग भी उठ रही है।वहीं नागरिकों ने सरकार से अपील की है कि समस्या का जल्द समाधान निकालकर डिजिटल रिकॉर्ड समय पर अपडेट किया जाए।

जालंधर RTO कार्यालय में कामकाज के दौरान कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। कई नागरिकों का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी बैकलॉग एंट्री और अन्य कार्यों के लिए आने वाले लोगों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल रहा,जिससे आवेदक परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण नहीं है, जिसके कारण दफ्तर में अनावश्यक भीड़ और देरी हो रही है।आवेदकों का कहना है कि उन्हें एक काउंटर से दूसरे काउंटर भेजा जाता है,लेकिन समाधान नहीं मिलता।

जनता ने परिवहन विभाग और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि दफ्तर में व्यवस्था सुधारी जाए, स्टाफ की जिम्मेदारी तय हो,और नागरिक सेवाओं को पारदर्शी व समयबद्ध बनाया जाए।साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ बार-बार शिकायतें आ रही हैं, उनके कार्य व्यवहार की जांच की जाए और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री न होने से पहले ही लोग परेशान थे,अब दफ्तर में कुछ कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठने लगे हैं। आवेदकों का कहना है कि काम करवाने आए लोगों को सही जानकारी नहीं मिल रही,कई बार उनको इधर-उधर भटकाया जाता है।कुछ नागरिकों का आरोप है कि एक महिला क्लर्क का व्यवहार विशेष तौर पर सहयोगपूर्ण नहीं है,जिससे दफ्तर में तनाव का माहौल बनता है और आम जनता को दिक्कत झेलनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि “काम कराने आए हैं, लेकिन व्यवहार ऐसा मिलता है जैसे हम अपनी गलती का जवाब देने आए हों।” कई आवेदकों ने मांग की है कि विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर स्टाफ के व्यवहार की जाँच करे और जरूरत पड़े तो तत्काल कार्रवाई भी की जाए,ताकि जनता को सम्मान और सुविधा के साथ सेवा मिल सके।

इधर RTO कार्यालय की व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएँ तेज़ हैं और लोग चाहते हैं कि दफ्तर की प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाया जाए। जनता की साफ माँग: 👉 स्टाफ के व्यवहार की जाँच हो 👉 व्यवस्था सुधारी जाए 👉 अशोभनीय रवैया अपनाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए अब देखना ये है कि विभाग इस गर्म माहौल को ठंडा करता है या यह मुद्दा और बड़ा रूप ले लेता है