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RBI गवर्नर शक्तिकांत दास का बयान, आखिरी तिमाही में महंगाई घटने की उम्मीद, भू-राजनीतिक जोखिम बरकरार

RBI governor shaktikanta das statement, inflation expected to decline in the last quarter, geopolitical risks remain
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मैक्रो वीक 2024 के दौरान कहा कि चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही से भारत में मुद्रास्फीति में क्रमिक कमी आने की संभावना है। साथ ही उन्होंने भू-राजनीतिक संघर्षों और अनियमित मौसमी घटनाओं से मुद्रास्फीति के प्रति जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स (PIIE) द्वारा मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में कहा, इस वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही से मुद्रास्फीति की दर में क्रमिक रूप से कमी का अनुमान है। हालांकि, अप्रत्याशित मौसमी बदलाव और भू-राजनीतिक संघर्षों का विस्तार मुद्रास्फीति के परिदृश्य के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।

दास ने भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीली वृद्धि पर जोर देते हुए कहा कि इसने RBI की मौद्रिक नीति समिति को मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य पर टिकाऊ रूप से कम करने पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 से पूरी तरह उबर चुकी है और पिछले तीन वित्तीय वर्षों में वास्तविक GDP वृद्धि औसतन 8% से अधिक रही है। वित्त वर्ष 2025 में RBI ने 7.2% GDP वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो समान रूप से संतुलित जोखिमों के अनुरूप है।

दास ने बताया कि घरेलू मांग में सुधार, इनपुट लागत में कमी और नीतिगत सहयोग से भारत की विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। सेवा क्षेत्र भी मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने बताया कि निजी खपत और निवेश, जो भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार हैं, सरकार के पूंजीगत व्यय और बैंकों व कॉर्पोरेट्स की स्वस्थ बैलेंस शीट के समर्थन से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने ग्रामीण और शहरी मांग में उछाल की भी बात की, जिसमें कृषि की अनुकूल स्थिति और सेवा क्षेत्र की बढ़त शामिल है।

दास ने भारतीय बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के मजबूत स्वास्थ्य मानदंडों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मजबूत वित्तीय सेहत के कारण ऋण प्रवाह में निरंतरता आई है, जिससे दूरस्थ और कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बल मिला है।

दास ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक संस्थानों और G20 देशों के लिए छह प्राथमिक क्षेत्रों पर जोर दिया अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना में सुधार, ऋण पुनर्गठन, वैश्विक वित्तीय नियमों का उन्नयन, डिजिटल विभाजन को कम करना, आर्थिक एकीकरण को मजबूत करना, और जलवायु वित्त पर ध्यान देना। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के जरिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बेहतर प्रतिनिधित्व और संसाधनों तक अधिक पहुंच मिलेगी, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता में सुधार होगा।

दास ने वैश्विक ऋण सेवा निलंबन पहल (DSSI) और ऋण पुनर्गठन में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी संरचना की जरूरत है जो सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के ऋणदाताओं को शामिल करे, समय पर पुनर्गठन सुनिश्चित करे और सतत विकास उद्देश्यों से जोड़ी जाए। उनका मानना है कि इस तरह के कदम वैश्विक वित्तीय स्थिरता को मजबूती देंगे और कमजोर देशों को अस्थिर ऋण बोझ से मुक्त करेंगे।

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