हर माह की त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव की पूजा के लिए समर्पित होती है। त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जिसमें संध्या के समय विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव प्रदोष व्रत रखने वाले अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। प्रदोष व्रत का महत्व और फल दिन के अनुसार होता है।
इस वर्ष कार्तिक माह 18 अक्टूबर से शुरू हो गया है। कार्तिक माह में पहला प्रदोष व्रत 29 अक्टूबर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। इस दिन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 30 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी।
क्योंकि यह प्रदोष व्रत मंगलवार को आ रहा है, इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। भौम प्रदोष व्रत करने से धन-संपत्ति से संबंधित परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
29 अक्टूबर को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त 5 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस दिन दुर्लभ शिववास योग भी बन रहा है, जिसमें महादेव अपने प्रिय वाहन नंदी पर सवार रहेंगे। इस शुभ समय पर महादेव की पूजा और अभिषेक से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने का प्रबल संयोग बन सकता है।
विशेष योग
इस दिन इंद्र योग, तैतिल और गर के साथ करण योग का भी निर्माण होगा, जो प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा को फलदायी बनाएगा।
महत्वपूर्ण समय
- सूर्य के उदय का समय: सुबह 6 बजकर 31 मिनट - सूर्य के अस्त होने का समय: शाम 5 बजकर 38 मिनट - चंद्रोदय का समय: सुबह 4 बजकर 27 मिनट (30 अक्टूबर) - चंद्रास्त का समय: शाम 3 बजकर 57 मिनट - ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 48 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट - गोधुलि मुहूर्त: शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट - निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट
29 अक्टूबर के पहले प्रदोष व्रत का पालन कर भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की कामना कर सकते हैं।
When will the first pradosh fast of kartik month be observed, know the date and auspicious time of worship