वित्त वर्ष 2024 में देश के चार प्रमुख दूरसंचार ऑपरेटरों पर कुल कर्ज 4,09,905 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। संसद में बुधवार को पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्वामित्व वाली बीएसएनएल ने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले सबसे कम 23,297 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज किया।
संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों में बताया कि 31 मार्च 2024 तक वोडाफोन आइडिया पर 2.07 लाख करोड़ रुपये, भारती एयरटेल पर 1.25 लाख करोड़ रुपये और रिलायंस जियो पर 52,740 करोड़ रुपये का कर्ज था।
वित्त वर्ष 2022 में बीएसएनएल का कर्ज 40,400 करोड़ रुपये था, जिसे पुनरुद्धार पैकेज और सरकारी वित्तीय सहायता से घटाकर 28,092 करोड़ रुपये कर दिया गया। बीएसएनएल की कर्ज स्थिति में सुधार के लिए 2019 में लगभग 69,000 करोड़ रुपये का पहला पुनरुद्धार पैकेज दिया गया। इसके बाद 2022 में 1.64 लाख करोड़ रुपये का एक और बड़ा पुनरुद्धार पैकेज मिला, जो नई पूंजी निवेश, ऋण पुनर्गठन और ग्रामीण टेलीफोनी के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण जैसे पहलुओं पर केंद्रित था।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने बीएसएनएल को 89,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 4जी और 5जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने की मंजूरी दी है।
मंत्री चंद्रशेखर ने कहा, इन पुनरुद्धार पैकेजों के परिणामस्वरूप बीएसएनएल ने वित्त वर्ष 2020-21 से परिचालन लाभ अर्जित करना शुरू कर दिया है।
वोडाफोन आइडिया पर सबसे अधिक 2.07 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जो इसे कर्ज बोझ के मामले में शीर्ष पर रखता है। भारती एयरटेल पर 1.25 लाख करोड़ रुपये और जियो इन्फोकॉम पर 52,740 करोड़ रुपये का कर्ज है।
Debt of major telcos reaches rs 4 trillion in FY24