खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव जारी है। इस बीच, भारत के दबाव के आगे झुकते हुए कनाडा ने राजनीतिक शरण देने की अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। कनाडा सरकार ने घोषणा की है कि 29 नवंबर से कोई नया शरण आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन आवेदनों को मंजूरी दी जाएगी, उनकी सख्ती से जांच होगी।
कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिपार्टमेंट ऑफ इमीग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप (IRCC) ने प्राइवेट स्पॉन्सरशिप ऑफ रिफ्यूजीज (PSR) प्रोग्राम के तहत अधिकतम पांच लोगों के समूहों को ही अनुमति देने का फैसला किया है। 31 दिसंबर 2025 तक यह नियम लागू रहेगा। साथ ही, 29 नवंबर से पहले प्राप्त आवेदनों पर ही विचार किया जाएगा। कनाडा ने 2025 में 23,000 शरणार्थियों को बसाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन उनकी कड़ी जांच होगी।
कनाडा के इस कदम से सबसे अधिक पंजाब के युवाओं पर असर पड़ेगा। एसोसिएशन ऑफ कंसल्टेंट्स फॉर ओवरसीज स्टडीज के सचिव सुखविंदर नंदा ने बताया कि इस साल 30,000 से 40,000 छात्र और पर्यटक वीजा धारक किसी न किसी बहाने से कनाडा में शरण लेने का प्रयास कर रहे थे। हर साल लगभग 1.75 लाख छात्र स्टडी वीजा पर पंजाब से कनाडा जाते हैं।
कनाडा के इमीग्रेशन मंत्री मार्क मिलर ने बताया कि छात्रों के झूठे शरण आवेदनों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने इसके लिए इमीग्रेशन सलाहकारों को जिम्मेदार ठहराया, जो छात्रों को अनैतिक सलाह देते हैं। उन्होंने कहा, अधिकांश शरण आवेदन गलत होते हैं और वित्तीय संकट या ट्यूशन फीस न भरने जैसे कारण सामने आते हैं। IRCC को उन लाइसेंस प्राप्त सलाहकारों की जांच करनी चाहिए जो झूठे शरण दावे करने की सलाह देते हैं।
पंजाब के कई छात्र कनाडा में अलगाववादी रैलियों में शामिल होकर तस्वीरें खींचते हैं और इन्हें राजनीतिक शरण के लिए आधार बनाते हैं। अब कनाडा सरकार ने इस पर भी कड़ी निगरानी रखने की घोषणा की है।
Canada changed its asylum policy, it will have a big impact on the youth of punjab