इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, ने भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगाते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस कानून के तहत, भिखारियों को पैसे देने वाले नागरिकों पर भी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है।
मुख्य उद्देश्य:
शोषण समाप्त करना: संगठित भिक्षावृत्ति माफियाओं से निपटना।
सार्वजनिक सुरक्षा: सड़कों और ट्रैफिक सिग्नलों पर दुर्घटनाओं को रोकना।
सामाजिक पुनर्वास: भिखारियों को सरकारी योजनाओं, आश्रय गृहों और कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ना।
कानूनी प्रावधान:
भिखारियों और उन्हें पैसे देने वालों पर जुर्माना और एक महीने तक की जेल।
बार-बार उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई।
प्रशासन का दृष्टिकोण:
शहर में पुनर्वास कार्यक्रमों को मजबूत किया जाएगा ताकि भिक्षावृत्ति के शोषण के चक्र को तोड़ा जा सके। पुलिस और नगर निगम निगरानी सुनिश्चित करेंगे।
हालांकि इस फैसले को लेकर जनता में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं, लेकिन यह कदम अन्य शहरों के लिए एक मॉडल बन सकता है। इंदौर का यह साहसिक प्रयास एक ऐसे समाज की दिशा में अग्रसर है जहां किसी को भीख मांगने की जरूरत न पड़े।