पंजाब सरकार ने किसानों के तीखे विरोध के बाद विवादित लैंड पुलिंग स्कीम को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से किसान संगठन और विपक्षी दल इस योजना का विरोध कर रहे थे। उनका आरोप था कि सरकार इस स्कीम के जरिए उपजाऊ कृषि भूमि को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले करने की योजना बना रही है, जिससे खेती और किसानों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
गौरतलब है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही इस स्कीम पर चार हफ्तों के लिए रोक लगा चुका था। इसके बावजूद, जालंधर समेत कई जिलों में किसानों ने विरोध रैलियां आयोजित कीं। आज भी जालंधर में एक बड़ी किसान रैली निकाली गई, जिसमें इस योजना को तुरंत रद्द करने की मांग की गई।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने चेतावनी देते हुए कहा कि लैंड पुलिंग स्कीम लागू होने पर 65 हजार एकड़ से अधिक उपजाऊ ज़मीन, जिस पर गेहूं, धान और सब्जियां उगाई जाती हैं, नष्ट हो जाएगी। इससे राज्य में खाद्यान्न संकट गहराने का खतरा है और पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
लगातार बढ़ते दबाव के बीच, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस स्कीम को रद्द करने का फैसला लिया, जिसे किसान संगठनों ने अपनी बड़ी जीत बताया है।