भारत सरकार जल्द ही अपने महत्वाकांक्षी ‘सागरमाला 2.0’ प्रोजेक्ट की घोषणा करने जा रही है, जिसकी कुल लागत ₹75,000 करोड़ बताई जा रही है। यह 10 साल की योजना भारत को एक वैश्विक समुद्री और शिपबिल्डिंग हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखती है।
जानकारी के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट 2015 में शुरू की गई मूल सागरमाला योजना का उन्नत संस्करण होगा। इसमें विश्व-स्तरीय पोर्ट्स, शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, शिप रिपेयर और रीसाइक्लिंग सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सागरमाला 2.0 का फोकस देश में शिप ओनरशिप बढ़ाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने, और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को और सशक्त बनाने पर रहेगा।
सागरमाला परियोजना को जल, परिवहन और जहाजरानी मंत्रालय (MoPSW) द्वारा 2015 में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 12 प्रमुख और 200 से अधिक छोटे बंदरगाहों को जोड़कर एक मजबूत औद्योगिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क बनाना है।
सरकार का विज़न भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति (Maritime Powerhouse) बनाने और ग्लोबल सप्लाई चेन में एक अहम कड़ी के रूप में स्थापित करने का है।