चांदी के निवेशकों के लिए पिछले कुछ महीने काफी निराशाजनक रहे हैं। 29 जनवरी को घरेलू बाजार में चांदी ₹3,84,632 प्रति किलो के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। 19 अक्टूबर तक यह कीमत घटकर लगभग ₹2,08,380 प्रति किलो रह गई। यानी शिखर से करीब 46 प्रतिशत की गिरावट।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तस्वीर कमजोर बनी हुई है। मंगलवार को चांदी करीब 56.50-57.80 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। जनवरी के 121 डॉलर के उच्च स्तर से यह लगभग 53-54 प्रतिशत नीचे आ चुकी है।
दबाव क्यों बढ़ रहा है?
मुख्य वजहें साफ हैं। कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड मंगलवार को 108-110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में तनाव ने तेल को सहारा दिया है। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है।
साथ ही अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है। बाजार को लग रहा है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है। चांदी से कोई नियमित ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऊंची दरों वाले माहौल में यह कम आकर्षक हो जाती है।
एक्सपर्ट्स का अनुमान
जेपी मॉर्गन ग्लोबल रिसर्च का मानना है कि 2026 की चौथी तिमाही में चांदी करीब 63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर सकती है। बैंक ने पूरे साल का औसत अनुमान 84 डॉलर से घटाकर लगभग 70 डॉलर कर दिया है। 2027 के लिए उनका औसत अनुमान 63 डॉलर प्रति औंस है।
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के रणनीतिकार माइक मैकग्लोन भी सतर्क हैं। उनके अनुसार निकट भविष्य में चांदी 50 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। लंबे समय तक यह 50 से 84 डॉलर के दायरे में रह सकती है।
आगे क्या देखें?
बाजार की नजर 27-28 अक्टूबर की फेड बैठक पर है। ज्यादातर उम्मीद है कि इस बैठक में दरें नहीं बदली जाएंगी। हालांकि दिसंबर में दर बढ़ाने की आशंका बढ़ी है। आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़े (CPI और PPI) दिशा तय करेंगे। अगर आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आए तो चांदी पर और दबाव बन सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए सुझाव
मई में आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू कीमतों को कुछ सहारा मिला था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय गिरावट का असर पूरी तरह नहीं रुक पाया। आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सिर्फ कीमत गिरने को खरीदने का मौका न मानें। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। कच्चे तेल, अमेरिकी महंगाई आंकड़े, डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर बनाए रखें।
चांदी में निवेश जोखिम भरा है। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।