वॉशिंगटन: अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व की नीति पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। ट्रंप का कहना है कि अर्थव्यवस्था का विस्तार अपने आप महंगाई बढ़ने की वजह नहीं है। उनके मुताबिक, जरूरत से ज्यादा ऊंची ब्याज दरें आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर सकती हैं।
ट्रंप की नाराजगी खास तौर पर फेड के हालिया ब्याज दर फैसले को लेकर है। सितंबर में केंद्रीय बैंक ने दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद प्रमुख दर 3.75% से 4% के दायरे में पहुंच गई।
ट्रंप ने फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के रुख पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि वॉर्श को ब्याज दर बढ़ाने के फैसले का समर्थन नहीं करना चाहिए था। ट्रंप ने फेड बोर्ड को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उसे अपने प्रशासन के प्रति 'hostile' यानी विरोधी बताया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब व्हाइट हाउस और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के बीच मौद्रिक नीति को लेकर मतभेद लगातार चर्चा में हैं।
अमेरिका में कीमतों का दबाव फेड के लिए अभी भी बड़ी चुनौती है। मई 2026 में महंगाई दर 4.2% तक पहुंच गई थी, जो लगभग तीन साल का उच्च स्तर था। ऊर्जा कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय तनाव को इसके प्रमुख कारणों में गिना गया।
इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ नीति का असर भी कीमतों पर पड़ने की चिंता बनी हुई है। ऐसे माहौल में फेड के लिए ब्याज दरों में ढील देने और महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।
ट्रंप की दलील का केंद्र आर्थिक विकास है। उनका मानना है कि कारोबार और निवेश को गति देने के लिए कम ब्याज दरें मददगार हो सकती हैं। ऊंची दरों से कंपनियों, घर खरीदारों और कर्ज लेने वालों की लागत बढ़ सकती है।
वहीं फेड का मुख्य लक्ष्य कीमतों को स्थिर रखना है। इसलिए केंद्रीय बैंक के लिए केवल आर्थिक वृद्धि देखना पर्याप्त नहीं है; उसे यह भी आकलन करना होता है कि महंगाई किस दिशा में जा रही है।
आने वाले महीनों के महंगाई, रोजगार और आर्थिक वृद्धि के आंकड़े फेड की अगली नीति के लिए महत्वपूर्ण होंगे। अगर कीमतों पर दबाव बना रहता है तो ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख जारी रह सकता है। दूसरी ओर, महंगाई में लगातार नरमी आने पर मौद्रिक नीति में बदलाव की गुंजाइश बन सकती है।
फिलहाल अमेरिकी आर्थिक नीति में दो प्राथमिकताएं साफ दिखाई दे रही हैं—ट्रंप प्रशासन तेज आर्थिक गतिविधियों और कम उधारी लागत पर जोर दे रहा है, जबकि फेड महंगाई को नियंत्रित करने पर केंद्रित है। यही अंतर आने वाले समय में अमेरिकी आर्थिक बहस का अहम मुद्दा बना रह सकता है।