चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के अगले दिन अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर अपनी बात रखी। एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन के भीतर चल रही आपसी खींचतान का असर कांग्रेस की स्थिति पर पड़ा है।
वड़िंग ने कहा कि जब किसी राजनीतिक संगठन में नेताओं के बीच मतभेद और खींचतान बढ़ती है, तो उसका नुकसान पार्टी को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत तौर पर संगठन में किसी नेता से उनकी कोई शिकायत या परेशानी नहीं है।
CNN-News18 को दिए इंटरव्यू में वड़िंग से पंजाब कांग्रेस के भीतर उनके रिश्तों और पार्टी में चल रही चर्चाओं को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने सीधे तौर पर किसी नेता का नाम नहीं लिया।
हालांकि, उनके बयान से यह संकेत जरूर मिला कि पार्टी के कुछ नेताओं को उनके नेतृत्व को लेकर आपत्ति रही हो सकती है। वड़िंग ने इस मुद्दे को व्यक्तिगत विवाद बनाने के बजाय संगठन से जोड़कर देखने की बात कही।
इंटरव्यू के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ उनकी वायरल तस्वीर का मुद्दा भी उठा। तस्वीर और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के संदर्भ में वड़िंग ने कहा कि किसी भी संगठन में आपसी टकराव होने पर उसका असर कामकाज और राजनीतिक प्रदर्शन पर पड़ता है।
उन्होंने साफ तौर पर स्वीकार किया कि पंजाब कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं रही और पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ा।
वड़िंग का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की चर्चा तेज थी। पार्टी के भीतर फीडबैक लेने और राज्य संगठन की स्थिति का आकलन करने में पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट की भूमिका अहम रही।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पायलट ने पंजाब के नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की थी। इन बैठकों के बाद संगठन में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हाईकमान को फीडबैक दिया गया।
पायलट को 5 सितंबर को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने इस पद पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह ली थी।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का बयान ऐसे वक्त आया है जब पंजाब कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को लेकर बदलाव के दौर से गुजर रही है। उनके बयान में पार्टी के भीतर मतभेदों को लेकर स्वीकारोक्ति तो दिखाई दी, लेकिन उन्होंने किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप लगाने से परहेज किया।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व पंजाब इकाई में आगे क्या बदलाव करता है और नए संगठनात्मक समीकरण किस तरह आकार लेते हैं।